Reg No. - CHHBIL/2010/41479ISSN - 2582-919X
पत्रकारिता में AI: लाभ, कमियाँ और जिम्मेदार उपयोग- लेखक: कुमार बहुखंडी

पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र।
तकनीक की सहायता से बेहतर पत्रकारिता कैसे करें और किन जोखिमों से सावधान रहें?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पत्रकारिता की कार्यप्रणाली को बदल रही है। सूचना जुटाने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, साक्षात्कार को लिखित रूप देने, अनुवाद करने और समाचार का प्रारूप तैयार करने जैसे कार्यों में इसका उपयोग किया जा सकता है। इससे पत्रकारों का समय बच सकता है और बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी को समझना आसान हो सकता है।
इसके साथ ही एआई के उपयोग से तथ्यात्मक गलतियों, पक्षपात, निजता, रोजगार, मौलिकता और जनविश्वास से जुड़े प्रश्न भी सामने आते हैं। पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए इसके लाभों को समझने के साथ इसकी सीमाओं को पहचानना आवश्यक है।
एआई से तैयार सामग्री को समाचार का प्रारूप मानें। प्रकाशन से पहले उसकी जाँच और सम्पादकीय समीक्षा जरूरी है।
एआई को सरल शब्दों में समझें
पत्रकारिता में एआई के अलग-अलग उपयोग होते हैं। कुछ उपकरण किसी निर्धारित कार्य में सहायता करते हैं, जैसे रिकॉर्ड किए गए साक्षात्कार को लिखित रूप में बदलना या किसी दस्तावेज में आवश्यक शब्द खोजना।
दूसरी ओर, जनरेटिव एआई निर्देश के आधार पर नया पाठ, चित्र, ऑडियो या वीडियो तैयार करता है। उदाहरण के लिए, उससे समाचार का प्रारूप, शीर्षक के विकल्प या किसी विषय का परिचय लिखवाया जा सकता है।
दोनों प्रकार के उपकरणों के परिणाम जाँचने चाहिए। जनरेटिव एआई के मामले में विशेष सावधानी आवश्यक है, क्योंकि वह गलत जानकारी भी प्रभावशाली और विश्वसनीय भाषा में प्रस्तुत कर सकता है।
पत्रकारिता में एआई के लाभ
1. नियमित कार्यों में समय की बचत
एआई साक्षात्कार को लिखित रूप देने, सामग्री का सार तैयार करने, शीर्षक सुझाने और पृष्ठभूमि की जानकारी व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है। इससे पत्रकारों को क्षेत्रीय रिपोर्टिंग, लोगों से बातचीत और तथ्यों की पुष्टि के लिए अधिक समय मिल सकता है।
विद्यार्थियों के लिए उदाहरण: कॉलेज के किसी कार्यक्रम में लिए गए दस मिनट के साक्षात्कार का प्रारम्भिक प्रतिलेख एआई से तैयार कराया जा सकता है। लेकिन व्यक्ति का नाम, पद, आँकड़े और उद्धरण मूल रिकॉर्डिंग से मिलाने होंगे।
2. बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण
लम्बी रिपोर्टों, सार्वजनिक अभिलेखों और आँकड़ों में आवश्यक जानकारी तलाशने में एआई उपयोगी हो सकता है। इससे सरकारी खर्च, पर्यावरण, शिक्षा या व्यावसायिक गतिविधियों से सम्बन्धित रिपोर्टिंग को दिशा मिल सकती है।
हालाँकि, एआई द्वारा पहचाना गया कोई असामान्य आँकड़ा अपने-आप अनियमितता या भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं होता। वह आगे की पड़ताल का संकेत हो सकता है।
विद्यार्थियों के लिए उदाहरण: किसी बजट में एक मद का खर्च अचानक बढ़ने पर पत्रकार को उसके कारण जानने होंगे। केवल वृद्धि देखकर गलत कार्य का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
3. अनुवाद और बहुभाषी पत्रकारिता में सहायता
भारत जैसे बहुभाषी देश में एआई हिन्दी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के बीच अनुवाद में मदद कर सकता है। इससे एक ही विषय की सामग्री अलग-अलग भाषाओं के पाठकों तक पहुँचाना आसान हो सकता है।
फिर भी मुहावरों, स्थानीय अभिव्यक्तियों, तकनीकी शब्दों और सांस्कृतिक सन्दर्भों का अनुवाद सावधानी से करना चाहिए। शब्द सही होने पर भी कथन का आशय बदल सकता है।
4. समाचार को अधिक सुलभ बनाना
एआई की सहायता से वीडियो के उपशीर्षक, ऑडियो का लिखित रूप और लिखित समाचार का श्रव्य संस्करण तैयार किया जा सकता है। इससे श्रवण या दृष्टि सम्बन्धी कठिनाइयों वाले लोगों सहित विभिन्न पाठकों और दर्शकों तक सामग्री पहुँचाने में मदद मिल सकती है।
विद्यार्थियों के लिए उदाहरण: किसी समाचार वीडियो में सही उपशीर्षक जोड़ने से उसे बिना आवाज के भी समझा जा सकता है।
5. सत्यापन की प्रक्रिया में सहयोग
एआई दस्तावेजों की तुलना करने, परस्पर विरोधी जानकारी पहचानने और संदिग्ध सामग्री की ओर ध्यान दिलाने में सहायता कर सकता है। कुछ उपकरण चित्रों या दावों की जाँच में भी उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन किसी उपकरण का निष्कर्ष अन्तिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। मूल स्रोत, दस्तावेज, स्थान, समय और सम्बन्धित व्यक्तियों से पुष्टि आवश्यक है।
6. छोटे समाचार संस्थानों को सहायता
सीमित संसाधनों वाले समाचार संस्थान भाषा सुधार, अनुवाद, सम्पादन के प्रारम्भिक चरण और सामग्री के प्रारूपण में एआई की सहायता ले सकते हैं।
इसका वास्तविक लाभ उपकरण की लागत, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और परिणामों की जाँच में लगने वाले समय पर निर्भर करता है। अधिक सामग्री तैयार होना तभी उपयोगी है, जब उसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।
पत्रकारिता में एआई की कमियाँ और जोखिम
1. गलत तथ्य और मनगढ़ंत उद्धरण
जनरेटिव एआई कभी-कभी ऐसे नाम, तारीखें, घटनाएँ, सन्दर्भ या उद्धरण बना देता है जिनका वास्तविक आधार नहीं होता। तकनीकी भाषा में इस समस्या को अक्सर ‘हैलुसिनेशन’ कहा जाता है।
किसी व्यक्ति के नाम से मनगढ़ंत बयान प्रकाशित करना गम्भीर सम्पादकीय त्रुटि है। इससे उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा और समाचार संस्थान की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
विद्यार्थियों के लिए सीख: किसी कथन को उद्धरण चिह्नों में तभी लिखें, जब वह रिकॉर्डिंग, लिखित बयान या किसी सत्यापित स्रोत में उपलब्ध हो।
2. पक्षपात और असन्तुलित प्रस्तुति
एआई अपने प्रशिक्षण में प्रयुक्त सामग्री या उसे दिए गए निर्देशों में मौजूद पक्षपात को दोहरा सकता है। इससे किसी समुदाय, लिंग, सामाजिक समूह या राजनीतिक विचार के प्रति अनुचित प्रस्तुति हो सकती है।
पत्रकार को देखना चाहिए कि रिपोर्ट में किसका पक्ष शामिल है, किसका पक्ष छूट गया है और कहीं भाषा रूढ़ धारणाओं को बढ़ावा तो नहीं दे रही।
3. स्थानीय सन्दर्भ की सीमित समझ
पत्रकारिता में इतिहास, स्थानीय भाषा, सामाजिक सम्बन्धों और समुदाय की परिस्थितियों की समझ आवश्यक होती है। एआई किसी क्षेत्रीय शब्द, स्थानीय विवाद या सांस्कृतिक परम्परा का अर्थ गलत समझ सकता है।
साम्प्रदायिक तनाव, वंचित समुदायों और संवेदनशील व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ी रिपोर्टिंग में ऐसी भूलों के गम्भीर परिणाम हो सकते हैं।
विद्यार्थियों के लिए सीख: स्थानीय लोगों से बातचीत और घटनास्थल पर की गई रिपोर्टिंग विषय को समझने का महत्वपूर्ण आधार है।
4. निजता और गोपनीय स्रोतों को खतरा
अप्रकाशित साक्षात्कार, निजी जानकारी या गोपनीय दस्तावेज किसी एआई सेवा में डालने से स्रोत की पहचान और रिपोर्टिंग परियोजना से जुड़ी जानकारी उजागर होने का जोखिम पैदा हो सकता है।
संवेदनशील सामग्री साझा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि सम्बन्धित सेवा जानकारी को कैसे सुरक्षित रखती है और उसका क्या उपयोग करती है।
विद्यार्थियों के लिए उदाहरण: किसी गोपनीय शिकायतकर्ता का नाम, फोन नम्बर या पहचान बताने वाला विवरण बिना अनुमति और उचित सुरक्षा व्यवस्था के एआई उपकरण में नहीं डालना चाहिए।
5. भ्रामक चित्र, ऑडियो और वीडियो
एआई ऐसे दृश्य और आवाज तैयार कर सकता है जो वास्तविक लगें, जबकि वे किसी वास्तविक घटना की रिकॉर्डिंग न हों। किसी व्यक्ति को ऐसी बात कहते हुए भी दिखाया जा सकता है जो उसने कभी कही ही न हो।
इस प्रकार की सामग्री गलत सूचना फैलाने के साथ वास्तविक प्रमाणों पर लोगों के विश्वास को भी कमजोर कर सकती है।
समाचार में प्रयुक्त तस्वीरों और रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता बनाए रखना आवश्यक है। एआई से तैयार चित्र का उपयोग किया जाए तो उसे स्पष्ट रूप से ‘एआई-निर्मित चित्र’ या ‘प्रतीकात्मक चित्र’ बताया जाना चाहिए।
6. रोजगार और पत्रकारिता कौशल पर दबाव
स्वचालन के कारण कुछ संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या घटाने या कम समय में अधिक सामग्री तैयार करने का दबाव बढ़ सकता है।
एआई पर अत्यधिक निर्भरता से विद्यार्थियों के लेखन, शोध, साक्षात्कार और तथ्य-जाँच के कौशल का विकास भी प्रभावित हो सकता है।
विद्यार्थियों के लिए सीख: पहले स्वयं समाचार लिखने का अभ्यास करें। इसके बाद भाषा और संरचना सुधारने के सुझाव लें तथा समझें कि बदलाव क्यों आवश्यक हैं।
7. मौलिकता, स्रोत और कॉपीराइट सम्बन्धी प्रश्न
एआई से तैयार सामग्री कभी-कभी किसी मौजूदा रचना से बहुत मिलती-जुलती हो सकती है। उसमें जानकारी का मूल स्रोत भी स्पष्ट नहीं होता।
दूसरे संस्थान की रिपोर्ट को नए शब्दों में लिख देने से उसकी मूल रिपोर्टिंग का श्रेय समाप्त नहीं हो जाता। स्रोत की पहचान, उचित उल्लेख और मौलिक योगदान जरूरी हैं।
8. पाठकों के विश्वास में कमी
बिना जाँची सामग्री प्रकाशित करने, महत्वपूर्ण एआई उपयोग छिपाने या मौलिक रिपोर्टिंग के स्थान पर सामान्य सामग्री प्रस्तुत करने से पाठकों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
प्रकाशित सामग्री के लिए पत्रकार, सम्पादक और प्रकाशक की जिम्मेदारी बनी रहती है। ‘यह गलती एआई ने की थी’ कहना सम्पादकीय उत्तरदायित्व से बचने का आधार नहीं हो सकता।
विद्यार्थियों के लिए जिम्मेदार उपयोग की कार्यपद्धति
एआई का उपयोग करते समय निम्न प्रक्रिया अपनाई जा सकती है:
- उद्देश्य तय करें: स्पष्ट करें कि आपको प्रतिलेखन, अनुवाद, भाषा सुधार या जानकारी व्यवस्थित करने में सहायता चाहिए।
- मूल स्रोत सुरक्षित रखें: रिकॉर्डिंग, दस्तावेज, नोट्स और आधिकारिक बयान सम्भालकर रखें।
- तथ्य मिलाएँ: प्रत्येक नाम, पद, तारीख, आँकड़े और स्थान की पुष्टि करें।
- उद्धरण जाँचें: वक्ता के शब्द मूल रिकॉर्डिंग या लिखित बयान से मिलाएँ।
- सभी सम्बन्धित पक्षों को सुनें: विवादित विषय में प्रभावित व्यक्ति या संस्था का पक्ष लेने का प्रयास करें।
- गोपनीयता बनाए रखें: निजी और संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले अनुमति तथा सुरक्षा की जाँच करें।
- निर्मित सामग्री की पहचान बताएँ: एआई से बनाए गए चित्र, ऑडियो या वीडियो को स्पष्ट रूप से चिह्नित करें।
- अन्तिम समीक्षा स्वयं करें: प्रकाशन से पहले सामग्री की भाषा, सन्दर्भ, निष्पक्षता और तथ्यात्मक शुद्धता जाँचें।
कक्षा में अभ्यास
किसी कॉलेज कार्यक्रम पर अपने नोट्स के आधार पर लगभग 200 शब्दों की समाचार रिपोर्ट लिखिए। फिर एआई से केवल भाषा और संरचना सुधारने के सुझाव लीजिए।
दोनों प्रारूपों की तुलना करके जाँचिए:
- क्या किसी नाम, पद, तारीख या आँकड़े में बदलाव हुआ?
- क्या कोई नया तथ्य या बयान जोड़ दिया गया?
- क्या मूल आशय सुरक्षित रहा?
- क्या भाषा अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष हुई?
- किन सुझावों को स्वीकार करना उचित है और किन्हें छोड़ना चाहिए?
यह अभ्यास विद्यार्थियों को एआई के सुझावों का मूल्यांकन करने और सम्पादकीय निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायता करेगा।
निष्कर्ष
एआई पत्रकारिता में समय बचाने, जानकारी व्यवस्थित करने और सामग्री को अधिक सुलभ बनाने का उपयोगी साधन हो सकता है। इसका लाभ तभी सार्थक है, जब इसके साथ तथ्य-जाँच, मानवीय संवेदनशीलता और सम्पादकीय विवेक जुड़ा हो।
पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नई तकनीक सीखने के साथ प्रश्न पूछने, लोगों को सुनने, प्रमाण तलाशने और स्पष्ट भाषा में लिखने का अभ्यास जारी रखना चाहिए।
समाचार तैयार करने में एआई सहायता कर सकता है; उसकी सत्यता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पत्रकार की है।
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